तेल-गैस संकट ने बढ़ाई चिंता, अब होर्मुज में भारत उठाने वाला है बड़ा कदम
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े संघर्षों ने पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। खासतौर पर होर्मुज स्ट्रेट, जिसे दुनिया का सबसे अहम तेल मार्ग माना जाता है, वहां हालात बिगड़ने से कई देशों की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। अब खबर है कि भारत सरकार हालात की समीक्षा के बाद फिर से होर्मुज मार्ग के जरिए तेल और गैस टैंकर भेजने की तैयारी कर रही है।
सूत्रों के अनुसार, सरकार और तेल कंपनियों के बीच लगातार बैठकें चल रही हैं। सुरक्षा एजेंसियां भी इस पूरे ऑपरेशन पर नजर बनाए हुए हैं। यदि अंतिम मंजूरी मिलती है तो भारतीय जहाज दोबारा इस संवेदनशील समुद्री मार्ग से कच्चा तेल और एलएनजी लेकर भारत लौट सकते हैं। इससे देश की ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने में मदद मिलेगी।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। देश की करीब 80 प्रतिशत तेल जरूरतें विदेशों से पूरी होती हैं। इनमें सऊदी अरब, इराक, यूएई और कतर जैसे खाड़ी देश प्रमुख सप्लायर हैं। ऐसे में होर्मुज स्ट्रेट का महत्व भारत के लिए और भी ज्यादा बढ़ जाता है। यह समुद्री मार्ग फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और दुनिया के लगभग एक-तिहाई समुद्री तेल व्यापार का रास्ता यहीं से गुजरता है।
हाल के महीनों में क्षेत्र में बढ़ी सैन्य गतिविधियों के कारण कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने अपने जहाजों के रूट बदल दिए थे। बीमा कंपनियों ने भी जोखिम प्रीमियम बढ़ा दिया, जिससे तेल आयात की लागत में इजाफा हुआ। इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर भी देखने को मिला। भारत के लिए यह स्थिति आर्थिक मोर्चे पर चुनौती बन सकती थी, क्योंकि महंगा तेल सीधे महंगाई और व्यापार घाटे को प्रभावित करता है।
ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भारत की नई रणनीति
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अब केवल एक रूट या एक क्षेत्र पर निर्भर नहीं रहना चाहता। यही वजह है कि सरकार ने वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों और नए समुद्री मार्गों पर भी काम तेज कर दिया है। रूस से बढ़ता तेल आयात, रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार और नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश इसी रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं।
इसके अलावा भारतीय नौसेना और समुद्री सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका भी अहम हो गई है। सरकार चाहती है कि भारतीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित हो ताकि ऊर्जा आपूर्ति बाधित न हो। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में भारतीय नौसेना की निगरानी बढ़ाई जा सकती है। जरूरत पड़ने पर विशेष सुरक्षा एस्कॉर्ट भी दिए जा सकते हैं।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि होर्मुज मार्ग पूरी तरह सुरक्षित रहता है तो भारत को तेल आयात में राहत मिलेगी और बाजार में स्थिरता बनी रहेगी। वहीं दूसरी ओर, अगर तनाव फिर बढ़ता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से ऊपर जा सकती हैं। इसका असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों और आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है।
सरकार फिलहाल स्थिति पर लगातार नजर रख रही है और तेल कंपनियों के साथ मिलकर हर संभावित विकल्प पर काम कर रही है। भारत की कोशिश यही है कि किसी भी वैश्विक संकट के बावजूद देश में ऊर्जा की कमी न हो और आर्थिक गतिविधियां सामान्य रूप से चलती रहें। आने वाले दिनों में होर्मुज को लेकर भारत का यह बड़ा कदम पूरे एशियाई ऊर्जा बाजार के लिए अहम साबित हो सकता है।
