तेल-गैस संकट के बीच भारत का बड़ा फैसला, होर्मुज स्ट्रेट से फिर शुरू हो सकती है तेल सप्लाई
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल-गैस संकट ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। खासतौर पर ईरान और पश्चिमी देशों के बीच हालिया टकराव के बाद होर्मुज स्ट्रेट एक बार फिर वैश्विक चर्चा का केंद्र बन गया है। यही वह समुद्री मार्ग है जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और एलएनजी गुजरता है। इस तनाव का असर भारत पर भी साफ दिखाई दिया, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर काफी हद तक निर्भर है। अब खबर है कि भारत सरकार होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते दोबारा तेल टैंकर भेजने की तैयारी कर रही है।
सूत्रों के मुताबिक, सरकार की मंजूरी मिलते ही भारतीय जहाज खाड़ी देशों से कच्चा तेल और गैस लेकर वापस आने लगेंगे। यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाल के महीनों में क्षेत्रीय अस्थिरता और सुरक्षा जोखिमों की वजह से कई शिपिंग कंपनियों ने इस रास्ते पर गतिविधियां सीमित कर दी थीं। इससे सप्लाई चेन प्रभावित हुई और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। देश की लगभग 85 प्रतिशत तेल जरूरतें आयात के जरिए पूरी होती हैं। ऐसे में होर्मुज स्ट्रेट का सुरक्षित और सुचारु संचालन भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। यदि यह मार्ग लंबे समय तक बाधित रहता है तो भारत को वैकल्पिक रास्तों और महंगे आयात का सहारा लेना पड़ सकता है, जिससे घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतें बढ़ सकती हैं।
भारत के लिए क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?
होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और इसे दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग माना जाता है। सऊदी अरब, यूएई, कुवैत, इराक और कतर जैसे बड़े तेल उत्पादक देशों का निर्यात इसी रास्ते से होता है। भारत अपने कुल तेल आयात का बड़ा हिस्सा इन्हीं देशों से खरीदता है। यही वजह है कि इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव सीधे भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है।
हाल के दिनों में वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। निवेशकों और ऊर्जा कंपनियों को डर है कि यदि संघर्ष बढ़ता है तो सप्लाई प्रभावित हो सकती है। हालांकि भारत सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। ऊर्जा मंत्रालय और शिपिंग से जुड़ी एजेंसियां मिलकर सुरक्षा उपायों पर काम कर रही हैं ताकि भारतीय जहाज सुरक्षित तरीके से इस मार्ग से गुजर सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह कदम केवल ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए नहीं बल्कि रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। भारत लंबे समय से अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के लिए कई देशों के साथ समझौते कर रहा है। इसके अलावा देश रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार को भी बढ़ा रहा है ताकि आपात स्थिति में तेल की कमी न हो।
सरकार वैकल्पिक सप्लाई रूट और नए ऊर्जा स्रोतों पर भी फोकस कर रही है। रूस, अमेरिका और अफ्रीकी देशों से तेल आयात बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके बावजूद खाड़ी देशों का महत्व अभी भी सबसे ज्यादा है। इसलिए होर्मुज स्ट्रेट में भारतीय टैंकरों की वापसी को भारत की ऊर्जा रणनीति का बड़ा कदम माना जा रहा है।
अगर आने वाले दिनों में स्थिति सामान्य रहती है तो इससे वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता लौट सकती है। साथ ही भारत को भी राहत मिलेगी और घरेलू ईंधन कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर होर्मुज स्ट्रेट और मध्य पूर्व की बदलती परिस्थितियों पर टिकी हुई है।
